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शनिवार, 12 दिसंबर 2015

केलेंडर बदल गया - शुभा

केलेंडर बदल 
गया 
     खूंटी वही है  
      रातें गुजरती हैं 
      तारीखें बदलती हैं
      कभी सोचा है
      कि हम कहाँ हैं
     खूंटी की तरह वहीँ
       या फिर तारीखों की तरह 
       आगे बढ़ रहे हैं  ।
     या फिर  पकड़े हैं 
     अपनी लकीर की फकीरी ।
  समय के साथ चलना सीखो
       आगे बढ़ के जीना सीखो 
करो समन्वय नई पीढ़ी के साथ
        चलों मिला कर हाथों से हाथ
      तभी तो होगी जीत तुम्हारी
       पाओगे ना कभी तुम हार 
  पथ के कंटक फूल बनेगें 
        राह बने सदा  गुलजार ।

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

एक जश्न ऐसा भी...... रीना मौर्या


आज मैंने देखा सड़क पर
एक नन्हा सांवला बच्चा
प्यारा सा,, खाने की थाली में कुछ ढूंढ़ता हुआ
उस थाली में था भी तो ढ़ेर सारा पकवान .....
वहीँ पास उसकी बहन थी
जो एक सुन्दर से दिए के
साथ खेल रही थी .....
दिए की रोशनी से उसकी आँखे चमचमा रहीं थी
वो छोटी सी झोपड़ी भी दिए के
रोशनी से रोशन हो गयी थी...
वरना दूर सड़क पर की स्ट्रीट लाइट
का सहारा तो था ही...
बगल में बैठी उसकी माँ
अपने बच्चों की ख़ुशी से
फूली नहीं समां रही थी...
थोड़ी ही दूर अगले मोड़ पर एक दावत थी..
सेठ जी के  पोते का मुंडन था...
शायद वहां के सेठ-या सेठानी
इनपर मेहरबान हुए होंगे
तभी तो आज यहाँ भी जश्न का माहौल है...
शायद जब महलों में दिया जलता है
तभी होती है इन झोपड़ियों में रोशनी ....!!

लेखक परिचय -  रीना मौर्या 

बुधवार, 28 अक्तूबर 2015

मुस्कुराने दो - अंजना दयाल

नहीं कहनी तकरीरें मुझको,
बस संग सबके मुस्कुराने दो

हिन्दू को, मुसलमां को, ईसाई-ओ-यहूदी को,
मेरे दिल के सुर्ख़ कोने में सुकूं से रहने दो

नहीं जीतनी कोई बेहस मुझे,
बस इन्सां को गले से लगाने दो

मैं भी वाकिफ़ हूँ फ़र्क़ों से, मगर
मुझे मुशबिहात में रम जाने दो

मेरे पास भी बर्दाश्त नहीं हर एक के लिए,
जिस-जिस को उसने बनाया, उनसे से तो दिल लगाने दो

लेखक परिचय - अंजना दयाल    

मंगलवार, 22 सितंबर 2015

मन के मुताबिक चलने से -- सदा जी


आराम से
थकने के बारे में
सोचा है कभी
इससे भी थक जाता है मन
हर चीज से थकान का अनुभव होता है
नहीं थकते हैं हम सिर्फ
मन के मुताबिक चलने से .....!!!

कभी खुश रहने की
अभिलाषा पूरी नहीं होती
खुशी हमेशा जाने क्‍यूं
दूर ही रहती है
कभी पा लेना
इच्छित वस्‍तु
खुशी को पाना क्षणभंगुर सा
अगले ही पल
बढ़ जाती है खुशी
दूसरे पड़ाव पर
वह नित नये
ठिकाने बदलती रहती ह‍ै
और हम
उसकी तलाश में हो लेते हैं ...!!! 


--  जी की एक बेहतरीन रचना 

बुधवार, 2 सितंबर 2015

गहरा सन्नाटा ....दीपक सैनी

गहरा सन्नाटा है
शोर से पहले
और
शोर के बाद
जानते हुए भी
खोये रहते है इसी शोर में
हजारों पाप की गठरी लादे
चले जाते है
भूल कर उचित अनुचित
मगन रहते है
इसी शोर में
जो क्षणिक है
अन्जान  बने रहते है
उस सन्नाटे से
जो सत्य है
जो निश्चित है
हर शोर के बाद

लेखक परिचय - दीपक सैनी

शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

.... पहला प्यार :))

ज़िंदगी का पहला प्यार 
कौन भूलता  है
ये  पहली  बार होता  है  

जब कोई किसी को
खुद से बढ़कर 

चाहता है
उसकी पसंद उसकी ख्वाहिश 

में खुद को भूल जाता है
होता है इतना 

खूबसूरत पहला प्यार 
तो न जाने
क्यों अक्सर अधूरा रह जाता  है .....!!!


-- राज चौहान 

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

महा शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ -- संजय भास्कर


म्हारा हरियाणा ब्लॉग की ओर से आप सभी ब्लोगर मित्रों को सपरिवार महा शिवरात्रि की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ .....!!

-- संजय भास्कर 

गुरुवार, 1 जनवरी 2015

नव वर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ -- संजय भास्कर


म्हारा हरियाणा ब्लॉग की ओर से आप सभी ब्लोगर मित्रों को
आपको सपरिवार नव वर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ .....!!

-- संजय भास्कर 
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