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बुधवार, 30 जुलाई 2014

ओ काले मेघा { चोका }

प्यासी धरती 
तड़पे दिन-रात 
ओ काले मेघा !
सुनो जरा पुकार 
छा जाओ तुम 
ढक लो आसमान 
चाहते सभी 
ठंडी-ठंडी फुहार 
हरियाली हो 
पत्ता-पत्ता मुस्काए 
सूनी धरा का 
कर देना उद्धार 
तपन मिटे 
मादकता छा जाए 
अंग-अंग पे 
चढ़े नया खुमार 
ओ काले मेघा 
बरसो छमाछम 
देना ये उपहार |

दिलबाग विर्क 
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