समर्थक

यह ब्लॉग हरियाणा के ब्लॉग लेखकों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से निर्मित किया गया है | हरियाणा के सभी ब्लॉग लेखकों से निवेदन है कि वे इस ब्लॉग से न सिर्फ जुड़ें अपितु अपनी पोस्ट से इसे समृद्ध बनाएँ अगर अलग से पोस्ट न लिख पाएँ तो अपने ब्लॉग पर लिखित पोस्ट का लिंक ही लगाकर भागेदारी बनाए रखें |
इस ब्लॉग से लेखक के रूप में जुड़ने के लिए -------- dilbagvirk23@gmail.com -------पर ईमेल करें |

LATEST:


विजेट आपके ब्लॉग पर

रविवार, 29 सितंबर 2013

...........पढ़ना था मुझे :)


पढ़ना था मुझे पर पढ़ न पाई,
सपनों को अपने सच कर ना पाई;
रह गए अधूरे हर अरमान मेरे,
बदनसीबी की लकीर मेरे माथे पे छाई |

खेलने की उम्र में कमाना है पड़ा, 
झाड़ू-पोंछा हाथों से लगाना है पड़ा; 
घर-बाहर कर काम हुआ है गुज़ारा, 
इच्छाओं को अपनी खुद जलाना है पड़ा | 

एक अनाथ ने कब कभी नसीब है पाया, 
किताबों की जगह हाथों झाड़ू है आया; 
सरकारी वादे तो दफ्तरों तक हैं बस, 
कष्टों में भी अब मुसकुराना है आया | 

नियति मेरी यूं ही दर-दर है भटकना, 
झाड़ू-पोंछा, बर्तन अब मजबूरी है करना; 
हालात मेरे शायद न सुधरने हैं वाले, 
अच्छे रहन-सहन और किताबों को तरसना !

मेरा काव्य पिटारा ब्लॉग से ई. प्रदीप कुमार साहनी जी की एक बेहतरीन रचना आज सभी के साथ साँझा कर रहा हूँ...........उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी  !

-- संजय भास्कर 


Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
MyFreeCopyright.com Registered & Protected