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मंगलवार, 26 मार्च 2013


........वो बार बार धमकाए चले जाते हैं ...

होली आते ही पतिदेव एलान कर देते हैं
रंग चेहरे को खराब कर देते हैं  
हम न खोलेंगे दरवाज़ा
न खेलेंगे फाग होली
वो बार बार धमकाए चले जाते हैं ......

न किसी  का फ़ोन उठाएंगे
न किसी को घर बुलायेंगे
किसी की बातो में न आयेंगे
बेमतलब ही भीगने न जाएँगे
वो बार बार धमकाए चले जाते हैं ......

इतने सालो के साथ का असर
कर देते हम धमकियाँ बेअसर
हाँ में हाँ मिलाते चले जाते हैं
कैसे भिगोये उन्हें हर बार
मंसूबे बनाये चले जाते हैं
वो बार बार धमकाए चले जाते हैं ......

देकर लालच मेवे वाली गुझिया का
मना लेते हैं हम मन अपने रसिया का
माथे पर इक छोटा सा तिलक लगायेंगे
रंग गीला नहीं बस सुखा  ही लगायेंगे
बस बार ये तसल्ली दिए जाते हैं
वो बार बार धमकाए चले जाते हैं .....
 
टीका लगाने  का ढोंग करते जाते हैं
उन्हें अपने प्यार में रँगे चले जाते हैं
कसमें भूल वो हममें समाये जाते हैं
आँखों ही आँखों से वार किये जाते हैं
होली में पिया के संग यूँ जिया करते हैं
वो क्यों बार बार धमकाए चले जाते हैं ...





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