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गुरुवार, 24 अक्तूबर 2013

मन के मुताबिक चलने से -- सदा जी

आराम से
थकने के बारे में
सोचा है कभी
इससे भी थक जाता है मन
हर चीज से थकान का अनुभव होता है
नहीं थकते हैं हम सिर्फ
मन के मुताबिक चलने से .....!!!

कभी खुश रहने की
अभिलाषा पूरी नहीं होती
खुशी हमेशा जाने क्‍यूं
दूर ही रहती है
कभी पा लेना
इच्छित वस्‍तु
खुशी को पाना क्षणभंगुर सा
अगले ही पल
बढ़ जाती है खुशी
दूसरे पड़ाव पर
वह नित नये
ठिकाने बदलती रहती ह‍ै
और हम
उसकी तलाश में हो लेते हैं ...!!! 


--  जी की एक बेहतरीन रचना 



3 टिप्‍पणियां:

  1. सच मन के मुताबिक चलने में थकावट नहीं होती |
    नई पोस्ट मैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 26/10/2013 को बच्चों को अपना हक़ छोड़ना सिखाना चाहिए..( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 035 )
    - पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

    उत्तर देंहटाएं

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