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सोमवार, 17 जून 2013

एक कदम तू चल तो सही -- आनन्द मेहरा



" तू चल तो सही अपने कदम,

हर हालत में कही न कही पहुच ही जायेगा.

बैठा रहेगा एक जगह पर तो,

वही पर रह जायेगा.

कदम छोटे ही भले ही चल,

मगर कदमो को रुकने मत दे,

नदी की तरह खुद अपने रास्ते बना लेगा.

कदमो को गर जरुरत पड़े तो थोडा विश्राम दे,

मगर एक जगह पर टिक अपने मंजिल से अपने को दूर मत कर.

चल चला चल कदमो से अपने कितनो के लिए रास्ते बनाता चल......!!!!


कारवां जारी है ब्लॉग से आनन्द मेहरा जी की एक बेहतरीन रचना आपके साथ साँझा कर रहा हूँ .....उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी  !


@ संजय भास्कर  

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (18-06-2013) के चर्चा मंच -1279 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  2. 'कही न कही पहुच ही जायेगा.'
    कहीं न कहीं पहुँचने की बात से पहले अच्छा हो कर लें अपनी दिशा ज्ञात !

    उत्तर देंहटाएं
  3. मगर एक जगह पर टिक अपने मंजिल से अपने को दूर मत कर.

    चल चला चल कदमो से अपने कितनो के लिए रास्ते बनाता चल......!!!!--सुंदर अभिव्यक्ति.
    latest post पिता
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,सुंदर रचना,,,साझा करने के लिए आभार

    RECENT POST : तड़प,

    उत्तर देंहटाएं
  5. देवासुर संग्राम हो रहा नित-प्रति हर युग में हर बार
    उचित अनुचित की समझ कठिन है ज्यों हो दोधारी तलवार ।
    हुआ पराजित नर षड-रिपु से नित्य निरंतर बारम्बार
    लक्ष्य हेतु तत्पर है फिर भी उसे चुनौती है स्वीकार ।
    प्रशंसनीय प्रस्तुति ।

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  6. कुछ सिखाती समझाती कविता...... बहुत सुंदर भाव

    उत्तर देंहटाएं

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