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बुधवार, 24 अप्रैल 2013

दिन में फैली ख़ामोशी -- संजय भास्कर


जब कोई इस दुनिया से
चला जाता है
वह दिन उस इलाके के लिए
बहुत अजीब हो जाता है
चारों दिशओं में जैसे
एक ख़ामोशी सी छा जाती है
दिन में फैली ख़ामोशी
वहां के लोगो को सुन्न कर देती है
क्योंकि कोई शक्श
इस दुनिया से
रुखसत हो चुका होता है ...........!!!!!

 
चित्र - गूगल से साभार

 
@ संजय भास्कर 

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह प्रस्तुति कल के चर्चा मंच पर है
    कृपया पधारें
    charchamanch.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  2. प्रकृति का नियम तो सबको मानना ही पड़ता है
    डैश बोर्ड पर पाता हूँ आपकी रचना, अनुशरण कर ब्लॉग को
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post बे-शरम दरिंदें !
    latest post सजा कैसा हो ?

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत भावपूर्ण रचना |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  4. सच कहा आपने जब कोई चला जाता है तब प्रकृति भी दु:खी होती है

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सच कहा है...बहुत भावपूर्ण रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  6. siraf wah din hi nahi balki aanewale pratyek din ki khamoshi janewale ki yad dilata hai shayad jivn bhar ....bahut acchi rachna dil ko chhoone wali .......dhanyavad sanjay jee ....

    उत्तर देंहटाएं

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