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रविवार, 31 मार्च 2013

कुछ क्षणिकायें

( 1.)  कमाल
 21 वी सदी में देखो
लोकतंत्र का कमाल अब पढ़े लिखे भी
वोटिंग मशीन पर
लगाते है अंगूठे से निशान !

 

( 2.)  फिल्मे 

आजकल चल रही फिल्मे
कर रही है कमाल
जिन्हें देख शर्म भी खुद
शर्म से हो रही है लाल ..........!



@ संजय भास्कर

मंगलवार, 26 मार्च 2013


........वो बार बार धमकाए चले जाते हैं ...

होली आते ही पतिदेव एलान कर देते हैं
रंग चेहरे को खराब कर देते हैं  
हम न खोलेंगे दरवाज़ा
न खेलेंगे फाग होली
वो बार बार धमकाए चले जाते हैं ......

न किसी  का फ़ोन उठाएंगे
न किसी को घर बुलायेंगे
किसी की बातो में न आयेंगे
बेमतलब ही भीगने न जाएँगे
वो बार बार धमकाए चले जाते हैं ......

इतने सालो के साथ का असर
कर देते हम धमकियाँ बेअसर
हाँ में हाँ मिलाते चले जाते हैं
कैसे भिगोये उन्हें हर बार
मंसूबे बनाये चले जाते हैं
वो बार बार धमकाए चले जाते हैं ......

देकर लालच मेवे वाली गुझिया का
मना लेते हैं हम मन अपने रसिया का
माथे पर इक छोटा सा तिलक लगायेंगे
रंग गीला नहीं बस सुखा  ही लगायेंगे
बस बार ये तसल्ली दिए जाते हैं
वो बार बार धमकाए चले जाते हैं .....
 
टीका लगाने  का ढोंग करते जाते हैं
उन्हें अपने प्यार में रँगे चले जाते हैं
कसमें भूल वो हममें समाये जाते हैं
आँखों ही आँखों से वार किये जाते हैं
होली में पिया के संग यूँ जिया करते हैं
वो क्यों बार बार धमकाए चले जाते हैं ...





गुरुवार, 7 मार्च 2013

ग़ज़ल

सोचो तुम तन्हाई में 
लुटते हम दानाई में ।


उथले जल में कुछ न मिले 
मिलता सब गहराई में ।


दौलत को सब कुछ माना 
उलझे पाई - पाई में ।


हमको भाते गैर सभी
दुश्मन दिखता भाई में ।


दिल का खेल बड़ा मुश्किल
खोई नींद जुदाई में ।


विर्क यकीं बस तुम करना
दें दिल चीर सफाई में ।


--------दिलबाग विर्क

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