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शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

कविता


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7 टिप्‍पणियां:

  1. गजब आदरणीय-
    एक नया दृष्टिकोण -
    शुभकामनायें-
    सादर

    तड़पाती तकलीफ तो, तड़-पड़ पाती चैन |
    दिल बाग़ बाग़ है पर इधर, तड़प तड़प कुल रैन |
    तड़प तड़प कुल रैन, मान लो मिल ही जाती |
    लड़ा लड़ा दो नैन, देह तो थक ही जाती |
    हट जाता फिर ख्याल, याद भी आ ना पाती |
    इसीलिए खुशहाल, रहूँ जब तू तडपाती ||

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. अरे..... सूचना तो रविकर जी ने दे ही दी है।
    बहुत सुन्दर मधुमास की रचना!
    बसन्त पञ्चमी की शुभकामनाएँ!

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  4. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर सार्थक प्रस्तुति दिलवाग जी,सादर आभार.

    उत्तर देंहटाएं

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