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सोमवार, 24 दिसंबर 2012

गरम चाय की प्याली



इस गरम चाय की प्याली को देख कर मनो ताजगी छा गई है मन में , चाय जैसी भी प्याली में उसे पी जाओ खुसी से जिए जाओ | गरम चाय के साथ सभी मित्रो को सुबह की नमस्ते.......... !

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

तलाश ...इस मन की

तलाश ...इस मन की

 आज दिन में आमिर खान ,रानी मुखर्जी और करींना  कपूर खान अभिनीत तलाश फिल्म  देखी ,फिल्म  अच्छी थी ,धीमी गति से चलती हुई सी इसने बोर नहीं होने दिया .पर सोचने को बहुत कुछ दिया ,ये हिंदी सिनेमा वाले ,अपने दर्शको की नब्ज़ को बहुत अच्छे से जानते है ,यहाँ कुछ नया करने की होड़ हर वक्त लगी रहती है | आज कल टीवी और सिमेमा दोनों ही तरफ़ मृत्यु के बाद के जीवन को दिखा कर दर्शकों में उत्सुकता पैदा करना चाह रहे है ,इस फिल्म में भी आमीर खान के बेटे की मृत्यु के बाद भी उसके वजूद को आत्मा से बात करने वाली एक औरत के माध्यम से दिखाया गया है जो कि रानी मुखर्जी ( उस मरे हुए बेटे की माँ और आमीर की पत्नी के रूप में )बात करते दिखाया गया है और वही साथ के साथ करीना कपूर खान को भी एक आत्मा के रूप में दिखाया गया है जो कि इस फिल्म के अंत में पता चलता है बस ये ही सस्पंस है इस फिल्म का ........पर असली  मुद्दा ये है कि ...क्या सच में मृत्यु के बाद आत्मा होती है ? क्या कोई ऐसा जीवन है जो मृत्यु के बाद शुरू होता है एक अनंत यात्रा के रूप में ? क्या हम मरे हुए लोगों से संपर्क कर सकते है ,उनसे बाते कर सकते हैं ?ऐसे बहुत से प्रश्न मेरे दिल और दिमाग को झंझोर रहे हैं क्यों कि ...अपने पापा की मौत के बाद मैंने भी अपने पापा को बहुत शिद्दत से याद किया है उन्हें मिस किया है (और शायद मेरे जैसे कितने ही दोस्त बंधु होंगे जो ठीक मेरे जैसा सोचते होंगे )...तो फिर क्यों नहीं पापा ने आज तक , किसी के माध्यम से मुझ से संपर्क किया ? क्यों नहीं वो मुझ से बात करने आए ?पापा के जाने के बाद मेरी माँ भी तो कितनी अकेली थी अगर आत्मा का कोई वजूद है तो वो क्यों नहीं हम लोगों की खोज खबर लेने आए ?

है कोई उत्तर इस बात का ???????


सच कुछ भी हो ...वो मैं नहीं जानती ....पर अपनी एक सोच आप लोगों के साथ साँझा कर सकती हूँ .....

 

 

आंखे .....

पापा को जब ,याद करके
रोने लगी जब ,ये आंखे
जो रों रों कर ,मैं भूल चुकी  थी 
सुख दुःख की
परिभाषा को
और भूल चुकी थी सब कुछ
केवल इतना याद रखने को
बनते देखा ,मिटते देखा
अपनी ही अभिलाषा को
दिल मे उठा दर्द है
निज  धुँधले अरमानों का
नहीं आज तक सुन पाई हूँ
उर के अस्फुट गानों का
ख़ुशी की तलाश में देखने
चली थी मैं
निर्जीवों के इस समूह में
जीवित कौन निराला है
पर गमो को साथ लिये
आज  हलाहल छलक रहा 
पीड़ित मन की आँखों से
लौटी हूँ मैं खाली हाथों से
देख  उनकी
मौन-निस्पंद पड़ी काया , मृत्यु की बाहों में ||
 अंजु ( अनु )

सोमवार, 3 दिसंबर 2012

कभी तुमसे -- सदा जी




















प्रेम ...... कभी तुमसे 
तुम्‍हारे दिल की कहता है 
कभी तुम्‍हारे दिल की सुनता है 
लेकिन तुमसे वो  नहीं कहता 
जो तुम्‍हें पसन्‍द नहीं 
वो तुमसे डरता है ...शायद 
ये डर भी  इसे 
इसी प्रेम ने दिया है 
क्‍योंकि इसने तुम्‍हारी खुशियों के साथ 
अपनी खुशियां देकर 
सौदा कर लिया है मन ही मन 
तुम जरा सा भी ना-खुश हो 
वह बात इसे मंजूर नहीं होती
बस इसे यही डर सताता है 
ये बात कहीं तुम्‍हें  नागवार गुजरी तो  ... 
तुम्‍हारा दिल दुखी होगा 
वो हंसता है तुम्‍हारी हंसी में 
रोता है तुम्‍हारे अश्‍क बहने पे
बहते हुए अश्‍कों के बीच
कभी कर देता है चुपके से
प्रेम ये सवाल भी .... ?
बिखरता है दर्द जब 
हद से ज्‍यादा 
कुरेद के  ज़ख्‍मी हिस्‍से को 
गहराई तक उतरकर
नमी को समेटकर 
जाने कैसे अश्‍क बना देती हैं आंखे  .....!!


सदा जी एक पुरानी बेहतरीन रचना आपके साथ साँझा कर रहा हूँ ..... उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी  !

@ संजय भास्कर 



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