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रविवार, 18 नवंबर 2012

हास्य कविता ...क्या करें बताओ न ...?

 क्या करें बताओ न ...?

इस बार तोह हद्द हो गई
बोरियत की भी अति हो गई
छूटियाँ क्या  हुई ,हालत खराब हुई
आधी जनता शहर से गायब हुई ...

मार्किट स्कूल बैंक सब बंद हुए
दोस्त रिश्तेदार भी सब भाग खड़े हुए
मूवी किसी की टिकेट मिले न
शौपिंग के माल भी अभी खुले न
आधे लोग परिवार के घर नहीं
बाकी के पास करने को कुछ है नहीं
दोस्त कोई भी घर पर मिला नहीं
चाय कॉफ़ी का कोई हमप्याला नहीं
फेस बुक पर भी कब तक बैठें
कितने लाईक कितने कमेंट्स करें
एक दूजे से भी कितनी बाते करें...

गीत भी तीन दिनों में इतने सुन लिए
मिठाइयाँ ,पकवान भी हज़म कर लिए
बोर हो गए हैं क्या करे कुछ तो बताओ
दिल लग जाए कोई रास्ता सुझाओ
आने में अभी सभी का काफी दिन पड़े हैं
कुछ न करने के बहाने भी बड़े हैं ....

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

आज भाई दूज पर विशेष .....



मेरी दुआओं का'' टीका '' भैया के नाम ...

.
कुछ दुआओं की रोली ,खुशिओं के चावल
प्यार के मोतिओं से पिरोकर एक मौली
मैंने भेजी है भैया तेरे नाम की ...
कुछ ज़ज्बात हमारे इस बंधन के
कुछ यादें हमारे उस बचपन की
मैंने भेजी हैं भैया तेरे नाम की

आज परदेस बैठी तेरी बहन तेरी राह देखा करती है
तुम्हारे बचपन के पल याद कर बस मुस्कुरा दिया करती हैं
फिर आँखों से लगा ,चूमकर ''टीका '' तुम्हे भेज दिया करती हैं
जानती हूँ  तुम हो अपनी दुनिया में मस्त
हम बहने भी हैं अपनी बगिया में व्यस्त
बंद लिफाफे में समेट कर प्यार भेज दिया करती हैं....

मन्नतों से तुम्हें पाया था,सर आँखों पे तुम्हे बिठाया था
इसलिए हर नाज़ हम बहनों ने तम्हारा उठाया था
क्या हुआ जो हमसे दूर हो ,पर हमारी आँखों का नूर हो
तुम जिओ हजारों  साल ,पाओ ज़िन्दगी में हर मुकाम
ये दुआ है इस बहना की  तुम मुस्कुराओ सुबह शाम....


बचपन में जैसे टीका लगवाने को इतराते थे
भाग के माँ के आँचल में छुप जाया करते 
आज भी भैया तुम बेशक इतरा लेना
पर मस्तक पर अपने  टीका लगा लेना
बस अपने प्यार का नेग भेज  देना 
                                            तुम्हारी बहना... .

बुधवार, 14 नवंबर 2012

on children 's day today ... ...माँ का अपने बेटे के लिए पत्र


on children 's day today ... ...माँ का अपने बेटे के लिए पत्र 

एक पत्र बेटे के नाम 

मेरे बेटे ......
बंद पलके जब उठाती हूँ तो तू ही नज़र आता है मुझे
दिन में हर वक़्त हर पल तू याद आता है मुझे
कैसे तुझे अपने पास बुलाऊं या खुद आ जाऊं
ये बिलकुल भी समझ न आये मुझे
तुझे खुद से दूर करने की तमन्ना न थी
तेरी ज़िन्दगी संवर जाए ये बस उम्मीद है मुझे
तेरी हर इच्छा पूरी हो हर सपने का आगाज़ हो
तेरी हर नेक मुराद पर यकीन है मुझे
कठिन राह पे चलते ,मंजिल पाना है भी मुश्किल
फिर भी जीत जाओगे ,लक्ष्य अपना पाओगे
ये खुदा से दुआ है मेरी और विश्वास है मुझे
तुम हमेशा सलामत रहो ,खुश रहो
नेक कर्म और परिश्रम बस करते रहो
ये ही बस तुमसे जुडी ख़वाइश है मुझे .....
तुम्हारी माँ 



सोमवार, 12 नवंबर 2012

ऐसी हो सब की दीवाली ...


ऐसी हो सब की दीवाली ....
एकता की लड़ी बने फुलझड़ी
भाव प्यार का बने अनार
उत्साह बने जीवन का दीपक
जोश की ज्योति बने चमक 
दुखों के अँधेरे का नाश हो
सुख , खुशियों का वास हो
मीठी बोली बने रंगोली
दीवाली हो या रंगों की होली
भ्रष्टाचार, जैसी बुराइयाँ मिटायें
सौहार्द की मिठास से मुंह मीठा कराएँ
शांति ,समृधि लेकर आये खुशहाली 
ऐसी हो आप सब की दीवाली
आओ सब मिलजुल कर दीप जलाएं
उमंग ,तरंग के रंग बिरंगे दीप जलाएं
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