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शनिवार, 27 अक्तूबर 2012

माँ ,सिर्फ तुम्हारे लिए


      माँ के लिए कविता 

दिल में  प्यार  और  आँखों  में  ममता  छलकाती  हमारे  लिए 
लबों पे दुआ और चेहरे पे मुस्कान हमेशा रखती हमारे लिए 
न खुद की कोई चाह न करे परवाह वो फ़िक्र करे  हमारे लिए 
हम फूलो की सेज पे कदम रखें वो काँटों पे चलती हमारे लिए 
दुखों की चादर झाड़कर खुशियों का बिस्तर लगाये  हमारे लिए 
ज़रूरत पड़े तो बन जाए दोस्त तो कभी गुरु बने हमारे लिए 

कभी खुद ही बलैया ले कभी डर के नज़र भी उतारे हमारे लिए 
आ जाए कोई मुश्किल वो दुआ करे और राह दिखलाए हमारे लिए 
वो ''माँ'' ही है बस जो हर पल खुशियाँ मांगे बस हमारे लिए 
वो '' माँ '' ही है  जिसने  दिया सब कुछ,मैं क्या  मांगू  उसके लिए 
ऐ  खुदा बस मेरी '' माँ'' को हर पल मेरे बस करीब ही रखना 
ऐ  ''खुदा ''बस ''माँ ''की छाया में मुझे महफूज़ ही रखना 
ऐ ''खुदा'' हर जनम मेरी ''माँ ''में ही मेरा वज़ूद ही रखना  

*************
                                                                                        
एक बेटी...रश्मि तरीका 

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह रश्मि जी इतनी सुन्दर रचना है की पढ़कर अश्क छलक पड़े। माँ को प्रणाम

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  2. मां से बढ़कर कोई नहीं... मां तो बस मां है

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