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शनिवार, 29 सितंबर 2012

छोड़ा है मुझको तन्हा --- बेकार बनाके,

छोड़ा है मुझको तन्हा --- बेकार बनाके,
मेरे ही गम का मुझको - औज़ार बनाके, 


तड़पाया उसने मुझको, हर रोज़ सजा दी,
यादों को भर है डाला -- हंथियार बनाके,
 

दिल में तेरा ही, तेरा ही -- प्यार भरा है,
पूजी है तेरी मूरत ----- सौ बार बनाके,


घोटाला - है रिश्वत - भ्रस्ठाचार बढा है,
जनता की बिगड़ी हालत, सरकार बनाके,
 

धड़कन को मेरी साँसों, को काम यही है,
जख्मों को रक्खा मुझमें, त्योहार बनाके,
 

समझे जो दुनियादारी -- वो दौर नहीं है,
खबरें उल्टी सीधी की --अखबार बनाके,
 

आँखों का पहले जैसा -- अंदाज़ नहीं है,
कर बैठी हैं अश्कों का-- व्यापार बनाके..

19 टिप्‍पणियां:

  1. म्हारा हरयाणा पर आपका स्वागत है ।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (30-09-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय शास्त्री सर आपने मेरी रचना को चर्चा मंच के लायक समझा आपका आभार

      हटाएं
  3. बहुत बढ़िया गजल अरुण जी....
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. रीना जी सराहने के लिया तहे दिल से शुक्रिया

      हटाएं
  4. घोटाला - है रिश्वत - भ्रस्ठाचार बढा है, 
    जनता की बिगड़ी हालत, सरकार बनाके, 
     bahut hi khubsurat rachna ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. घोटाला - है रिश्वत - भ्रस्ठाचार बढा है,
    जनता की बिगड़ी हालत, सरकार बनाके
    बहुत बढ़िया .

    उत्तर देंहटाएं
  6. I wonder how a lot attempt you set to make this kind of wonderful web site.
    From it's all about humanity

    उत्तर देंहटाएं
  7. अरुन जी
    नमस्कार !
    म्हारा हरियाणा ब्लॉग पर आपका स्वागत है | आपके शानदार तरीके से आगाज किया है | इसी तरह से अपनी भागेदारी बनाए रखिए !
    सहयोग के लिए आभार |
    संजय भास्कर

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. संजय भाई बहुत-२ शुक्रिया,
      अगर आप सभी का साथ रहा तो ये रिश्ता काफी दूर तलक जाएगा.

      हटाएं
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार (06-08-2013) के "हकीकत से सामना" (मंगवारीय चर्चा-अंकः1329) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं

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