समर्थक

यह ब्लॉग हरियाणा के ब्लॉग लेखकों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से निर्मित किया गया है | हरियाणा के सभी ब्लॉग लेखकों से निवेदन है कि वे इस ब्लॉग से न सिर्फ जुड़ें अपितु अपनी पोस्ट से इसे समृद्ध बनाएँ अगर अलग से पोस्ट न लिख पाएँ तो अपने ब्लॉग पर लिखित पोस्ट का लिंक ही लगाकर भागेदारी बनाए रखें |
इस ब्लॉग से लेखक के रूप में जुड़ने के लिए -------- dilbagvirk23@gmail.com -------पर ईमेल करें |

LATEST:


विजेट आपके ब्लॉग पर

शनिवार, 30 जून 2012

याद ( हाइकु )

बरसे नैना 
जैसे बादल कोई 
आई है याद ।

दूर सजन 
सताता है सावन 
याद सहारा ।

सांस की डोर 
जब तक न छूटी 
याद रहोगे ।

याद किया था 
ये क्या पूछा तुमने 
भूले कब थे ।

याद जो आती 
आँसुओं की बारिश 
थम न पाती ।


-------- दिलबाग विर्क 
*****************

बुधवार, 20 जून 2012

अनसुलझे....अजीब.....सवाल


सूख जाना ही है उसको इक रोज़
 तो पत्ता डाली पर पनपता क्यूँ है ,
 डरता है बदनामी से इस कदर
तो यह दिल प्यार करता क्यूँ है ,
बिछड़ना है तो दिल में प्यार
 पनपता क्यों है !
मरना है तो इन्सान जन्म लेता क्यों है  !
...........सवालों के जवाब चाहिए !

@ संजय भास्कर

गुरुवार, 7 जून 2012

ग़ज़ल


गुहर मिलते गए हमको मुहब्बत के दफीने से 
हुआ यूं ही, किया हमने नहीं कुछ भी करीने से ।

तुम्हारी मानता हूँ बात ये, बेहद बुरी है मय
जरूरत बन गई है मेरी, न मुझे रोक पीने से ।

न हसरत है कोई, साहिल कहा मझधार को हमने 
जिसे साहिल की हसरत हो, उतर जाए सफीने से ।

गला घोंटकर अरमानों का, जीते लोग दुनिया के 
ये जीना क्या जीना है, मर जाना बेहतर जीने से ।

कहाँ जाते हो कुछ फर्क नहीं, हो बस एक ही मकसद 
तलाश करो सकूं की, काशी से या फिर मदीने से ।

दीवाना हो गया है विर्क, बस तू जान ले ये सच 
हिसाब न पूछ, कितने दिन हुए, कितने महीने से ।

                 **********************

शुक्रवार, 1 जून 2012

SURESH KI MEHFIL: पिंजरे का पंछी

................गरीब हूँ मैं




रोटी के लिए घूमता रहता हूँ ,
इधर उधर ,
पाँव छिल जाते है ,
रुकता नही हूँ मगर ,
दिल से देगा मुझे कोई उसे भगवान् उसे बहुत देगा
मेरी दुआ है सभी के लिए ,
चाहे कोई बड़ा हो या छोटा ,
 मिटटी के खिलौनों से खेलते है बच्चे मेरे ,
गर्मी सर्दी बारिश को  हंस कर झेलते है
सर पर छत भी न दे सका अपने बच्चो को
बाप में अजीब हूँ
गरीब हूँ में मजबूर हूँ मैं ,
पूरी नही कर पाता बच्चो की इच्छाओ को ,
बहुत ही बदनसीब हूँ मैं ,
गरीब हूँ मैं गरीब हूँ मैं......


@  संजय भास्कर
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
MyFreeCopyright.com Registered & Protected