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सोमवार, 14 मई 2012

देख कर भी क्यों सुन नहीं पाया वो मेरी आँखों की धड़कन!...(कुँवर जी)

उम्मीद टूटी नहीं मगर
मलाल रहा...

देख कर भी क्यों सुन नहीं पाया वो मेरी आँखों की धड़कन!

एक पल ही सही
ठहरी थी नजर उसकी,
फिर भी क्यों सुलझा न पाया वो
मेरे माथे की सिकुडन!



कुँवर जी, 

12 टिप्‍पणियां:

  1. sundar prastuti........... pahli abaar blog par aakar achcha laga....

    उत्तर देंहटाएं
  2. उत्तर
    1. आदरणीय डॉ साहब बहुत बहुत आभार...

      हटाएं
  3. वाह बेहद खूबसूरत शब्दों की अभिव्यक्ति .....!

    उत्तर देंहटाएं
  4. उम्मीद बनी रहे। क्योंकि उम्मीद पर दुनिया टिकी है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से आभार।

    उत्तर देंहटाएं

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