समर्थक

यह ब्लॉग हरियाणा के ब्लॉग लेखकों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से निर्मित किया गया है | हरियाणा के सभी ब्लॉग लेखकों से निवेदन है कि वे इस ब्लॉग से न सिर्फ जुड़ें अपितु अपनी पोस्ट से इसे समृद्ध बनाएँ अगर अलग से पोस्ट न लिख पाएँ तो अपने ब्लॉग पर लिखित पोस्ट का लिंक ही लगाकर भागेदारी बनाए रखें |
इस ब्लॉग से लेखक के रूप में जुड़ने के लिए -------- dilbagvirk23@gmail.com -------पर ईमेल करें |

LATEST:


विजेट आपके ब्लॉग पर

गुरुवार, 29 मार्च 2012

जिकर करण के लायक नहीं और चुप रहया ना जावै....

                  हरयाणवी रागनी
जिकर करण के लायक नहीं और चुप रहया ना जावै,
जितना मै चुप रहणा चाहूँ यो रंज जिगर नै खावै!

धोखा और लालच आजकल बेहवै सै नस-नस मै,
करते बखत(1) ना ख्याल करै के कर रहये हम आपस मै,                 (1)-समय
जिब(2) बस मै बात ना आती दिक्खै तो जान तक लेणा  चाहवै,                  (2)-जब
लुच्चे माणस(3) उच्चे हो रहये साच्चो नै दबावै!                                      (3)-आदमी

सिधा माणस मरया  चौगर्दै(1) तै रो रहया अपणे करम,                    (1)-हर तरफ से
तन कर राख्या बज्र का पर भित्तर(2) तो वो सै नरम,                          (2)-अन्दर
भाई शर्म-शर्म मै सारया लुटग्या और कैह्ता सरमावै,
थोथा चणा बज रहया घणा असल ना टोहया(3) पावै!                              (3)-ढूँढने से

जग मै साफ़ घर मै दागी काम आजकल ऐसा होया,
ईमान और धरम-करम तो बस बात्या(1) का होया,                                   (1)-बातो
रोया बुगले वाले आंसू और साथ  वो सबका चाहवै,
नाड़(2) काट ले टूक खोस ले पर सुद्धा कहलावै !                                        (2)-गर्दन

दो घडी ईमान गेर कै जब जिया जावै सुख मै,
इमानदारी की राह पै फेर क्यों जीवै जिंदगी दुख़ मै,
इसी रूख(1) मै सबकी सोच ना इस गड्ढे तै बहार आवै,                     (1)-इसी ओर
सोच सबकी वैसी ही होई अन्न वे जैसा खावै! 

धोखा आज करया हमनै कल होग्या यो म्हारे साथ,
 दो आन्ने  की पतीली और दिख जात्ती कुत्ते की जात,
बात सुन कै ही समझ ल्यो ना तो भुगते पाच्छै आवै,
आवाज ना सुर-साज और हरदीप फेर भी गाणा चाहवै!

जय हिन्द,जय श्रीराम,
कुंवर जी,

शनिवार, 24 मार्च 2012

पर्दा

    
असलियत पे पर्दा पड़ा है,
                                            झूठ बेनकाब खड़ा है .
      झूठ को सत्य समझते हैं,
                                             सत्य लगता है झूठा .
     कर्म हमारे असफल हुए ,
                                                  दोष है कि विधाता रूठा .
                 कल था जो नाली का पत्थर,
                                                   आज कंगूरे जा चढ़ा  है .
असलियत पे पर्दा ................................................
     दुश्मन को दोस्त कहें ,
                                        या दोस्त को दुश्मन .
     स्पष्ट हैं भाव दुश्मन के ,
                                                    दोस्त की गद्दारी पे है चिलमन .
              जाहिर  दुश्मन की नहीं परवाह ,
                                                दोस्त में छिपा दुश्मन बड़ा है 
 असलियत पे पर्दा...................................................
मृगमरीचिका मैदान है जहान ,  
                                    मन बहलावें ख्वाब  हैं .
 प्रश्नों का तांता लगा है ,
                                                 न किसी के पास कोई जवाब हैं .
        जिस स्वाभिमान में ज़माने से टकराया,
                                                     वो स्वाभिमान  ही मुझपे भारी पड़ा है असलियत पे पर्दा पड़ा है ,
                                झूठ बेनकाब खड़ा है .
              असलियत पे पर्दा ..........................................................

                                                                                                       : -  कृष्ण कायत
                                                                                                           

शुक्रवार, 23 मार्च 2012

गुरुवार, 22 मार्च 2012

जय भारत , जय भारतीयता

नए सांझे ब्लॉग पर प्रथम पोस्ट कर रहा हूँ । माँ सरस्वती के आशीर्वाद का अभिलाषी हूँ और चाहता हूँ माँ कृपा से यह ब्लॉग हरियाणा के सभी लेखकों को एक मंच पर लाने में सफल रहे ।
             वैसे क्षेत्रवाद की बात करना कोई अच्छी सोच नहीं कही जाती । हमारा देश तो विश्व को एक परिवार मानने का संदेश देता रहा है । अब कम-से-कम हमें भारतीयता की बात तो जरूर करनी चाहिए । ऐसे में प्रदेश पर आधारित ब्लॉग क्यों ? दरअसल जब हम विदेश में होते हैं तब अपने देश का आदमी ढूंढते हैं , जब देश में होते हैं तब अपने प्रदेश का आदमी  ढूंढते  हैं और प्रदेश में आकर जिले तहसील का । यह आदमी की स्वभाविक प्रवृति है । अंतरजाल पर आकर यह इच्छा जागृत होती है कि मेरे प्रदेश के कितने लोग इससे जुड़े हुए हैं । कम-से-कम उन लोगों से निकटता चाहते हैं । वैसे ब्लोगर्स मीटिंग के कार्यक्रम पूरे देश के ब्लोगर्स को मिलवाने का काम करते हैं लेकिन कई कारणों के चलते दूर के क्षेत्र में हो रही इन मीटिंग्स में भागेदारी संभव नहीं हो पाती । ऐसे में अपने प्रदेश के लोगों से तो मुलाक़ात संभव है ही , लेकिन यह तब की बात है जब हमें पता हो कि प्रदेश के कितने लोग ब्लॉग लिखते हैं , उनकी विचारधारा क्या है ।
                  मैं हरियाणा के चार-पांच ब्लोगर्स को ही जानता हूँ , लेकिन यह निश्चित है कि ब्लॉग लिखने वाले लोग इससे ज्यादा हैं । मुझे आशा है कि यह ब्लॉग मुझे और अन्य ब्लोगर्स को हरियाणा के अधिकतर ब्लोगर्स से मिलवाएगा । हम सभी एक मंच पर इकट्ठे हो पाएंगे ।                
            क्षेत्रीयता का जहर फैलाना हमारा मकसद नहीं । हमें बात भारत की करनी है , भारतीय होना गर्व की बात है । हम हरियाणवी, पंजाबी, गुजराती बाद में हैं पहले भारतीय हैं । सिर्फ जान-पहचान को और पुख्ता करने के मकसद से ही यह क्षेत्रीय ब्लॉग बना है लेकिन इस ब्लॉग से भी यही आवाज उछ्लेगी ------- जय भारत , जय भारतीयता ।
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
MyFreeCopyright.com Registered & Protected